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sanskriti
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किसी यायावर के हृदय परिधि के भीतर जो वात्सल्य का भाव अपने यायावरी के शौक़ के लिए होता है वही मेरे भीतर भी पनपने लगा था पर दुर्भाग्य यह नहीं…