ये कहानी है एक लड़की की जिसने अपनों के डर से अपनी जान ले ली या फिर ये कहे की खुदकुशी कर ली। प्रिया जिसे पढ़ने का शौक था आगे बढ़ने का शौक था ,सब उससे बहुत प्यार करते थे ।मगर प्रिया के पिता काफी सख्त मिजाज के थे ।उनके कई नियम कानूनों में से एक ये भी था की वो किसी लडको से बात न करे ,उनसे कोई दोस्ती न रखे । स्कूल में एक बार उन्होंने उसकी कॉपी में से लेटर निकाला जो किसी लड़के ने दिया था ये देखकर उसके पापा ने उससे बहत मारा और चेतावनी दी की दोबारा ऐसा नहीं  होना चाहिए।इस घटना के बाद प्रिया सहम सी गई दर दर के जीने लगी।कुछ दिन के बाद वो बाहर घूमने निकली और  अपनी कार ले के  गई ।रास्ते में एक एक्सीडेंट हुआ जिसमे उसे तो कोई चोट नहीं आई मगर कर का शीशा टूट गया।अब प्रिया को लगा की अगर वो घर जायेगी तो उसके पापा उसे बुरी तरह डांटेंगे और इसी डर की वजह से वो गाड़ी को कारखाने ले गई ।शाम हो चुकी था और जब वो कारखाने पहुंची तो एक युवक ने उसे देखा और अपनी हवस मिटाने की सोची ।उसने लड़की से कहा , कि कार बनाने के वक्त लगेगा वो अंदर इंतजार करे।लड़की जो हकीकत से बेखबर थी जा के बैठ गई।थोड़ी देर में उस लड़के ने दरवाजा बंद किया और अपने घिनौने हरकत को वही अंजाम दिया। प्रिया जैसे तैसे करके वहां से भाग निकली ।घर आकर दरवाजा बंद कर ली और मुंह बन्द करके रोने लगी ताकि आवाज बाहर न आए।उधर घरवालों को लगा की वो स्कूल में किसी ने कुछ बोला होगा ,तभी ऐसा बर्ताव कर रही ।उसके पापा ने उसे बुलाया और फिर उसने सबके साथ खाना खाया।रात हो चुकी थी अब सोने चले गए और प्रिया अपने कमरे में ये सोच में पड़ी थी की कही आज की बात उसके पापा को पता चल गया तो क्या होगा ?क्या उसके पापा उसके बात का यकीन करेंगे या हमेशा की तरह गलत समझेंगे ?ये सारे डर उसपर हावी होने लगे और इसके बाद उसने खुद को खत्म करने का निश्चय किया।उसने अलमारी से ब्लेड निकाला और अपने हाथ की ओर ले गई ।प्रिया को ये डर था की उसकी चिल्लाने से सब जग जायेंगे तो उसने अपने मुंह को कस के पकड़ा ताकि बाहर आवाज न जाए और फिर उसने अपनी नस काट ली। असहनीय दर्द में होने के बावजूद भी उसने घरवालों को इसकी भनक तक लगने नहीं दी।जिस डर के माहौल में वो पली बढ़ी आज उसी डर ने उससे जिंदगी छीन ली । अगले दिन सवेरा हुुआ  मगर एक मां के लिए गहरी पीड़ा और पिता के लिए एक बड़ा सबक लाया।