अंधेरे में जो जलाए दीप,

ज्ञान की राह दिखाए सीप।

वो किरण है उम्मीदों की,

शशि ड्रीम फाउंडेशन है नींव नई पीढ़ियों की।

जहाँ किताबें हों सबसे प्यारी,

ना हो कोई भूख की मारी।

हर बच्चे की आँखों में हो सपना,

कि वो भी बन सके कल का अपना।

ना फर्क हो धन या जाति का,

ना डर हो समाज की बाती का।

हर बालक को मिले सम्मान,

मिले शिक्षा, मिले पहचान।

झुग्गियों में जब उम्मीदें मुस्काती हैं,

कलमों से तक़दीरें बनती हैं।

लड़कियाँ पढ़ती हैं, उड़ती हैं,

संघर्षों को शब्दों में गढ़ती हैं।

शशि का सपना, अब जन-जन का है,

हर बच्चा अब प्रकाश-पथ का राही है।

जहाँ सपनों को पंख मिलते हैं,

वहाँ से उजाले निकलते हैं।